डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए उनका अद्वितीय योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। "एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो संविधान नहीं चलेंगे" का उनका ऐतिहासिक उद्घोष केवल एक नारा नहीं, बल्कि अखंड भारत के प्रति उनके अटूट संकल्प का प्रतीक था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए उनका संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और देश की एकता से बड़ा कोई उद्देश्य नहीं हो सकता।
आइए, उनकी 125वीं जयंती पर हम राष्ट्र प्रथम की भावना को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समृद्ध और अखंड भारत के निर्माण का संकल्प लें।
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महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, भारतीय जनसंघ के संस्थापक और युगद्रष्टा नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।
"एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो संविधान नहीं चलेंगे" का प्रखर उद्घोष करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
उनका त्याग, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा आज भी हम सभी को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने तथा भारत की एकता और अखंडता को सुदृढ़ बनाए रखने की प्रेरणा देती है।