अखंड भारत के अमर बलिदानी: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को जयंती पर कोटि-कोटि नमन! 🇮🇳🙏🏻
6 जुलाई, 1901 को बंगाल की धरती पर जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने और स्वतंत्रता के बाद देश के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेकिन 1950 में पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं पर हुए अत्याचार और नेहरू-लियाकत समझौते ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने सत्ता छोड़ दी और 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर देश को एक नया वैचारिक विकल्प दिया।
कश्मीर में "दो विधान, दो निशान और दो प्रधान" के विरोध में उन्होंने बिना परमिट वहां प्रवेश कर व्यवस्था को चुनौती दी। गिरफ्तारी, नजरबंदी और उपचार में लापरवाही के बीच 23 जून, 1953 को उनका बलिदान हो गया, लेकिन उनका संकल्प अमर हो गया।
आज जनसंघ का वही वैचारिक बीज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विशाल वटवृक्ष बन चुका है। प्रधानमंत्री श्री
@narendramodi जी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 हटाना, CAA और नई शिक्षा नीति जैसे कदम उनके अनेक संकल्पों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
राष्ट्र प्रथम का उनका संदेश और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। 🔽