सुनते हैं खुशी भी है ज़माने में कोई चीज
हम ढूंढते फिरते हैं किधर है ये कहां है
जिंदगी में खुशियां बहुत ही ज्यादा जरूरी होती हैं और हर इंसान को खुश रहने का अधिकार होता है। अधिकतर लोग ये दिखाते हैं कि वो खुश हैं, लेकिन उनकी खुशी असलियत से कोसों दूर रहती है। खुश रहने के लिए किसी इंसान को किस चीज़ की जरूरत होती है? यह एक यक्ष प्रश्न है।
कई बार हम सोशल मीडिया पर लोगों की खुशहाल तस्वीरें देखकर ही ये समझ लेते हैं कि वो बहुत ही ज्यादा खुश हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। असल मायने में खुश होना और खुश दिखना दो अलग-अलग बातें हैं। बहुत बार जब आप खुश होते हैं तो उसे दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि आपके विचार, व्यवहार, बातचीत, चाल ढाल से वो खुशी छलकती रहती है जिसे कोई भी देख सुन सकता है।
खुशी से संबंधित एक दिलचस्प बात यह है: कि हमें अच्छा महसूस कराने के अलावा, खुशी वास्तव में हमें अधिक सफल भी बनाती है।
हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि पाज़िटिव विचारों वाले चिकित्सक 50% अधिक तेजी से इलाज करते हैं तथा उनमें तीन गुना अधिक intellectual flexibility होती है; विद्यार्थी जब खुश होते हैं, तो वे परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करते हैं;
मतलब आप जितना खुश रहते हैं उतने ही सफल होते हैं।
अब सवाल है कि खुश कैसे रहें, तो इसके बहुत से वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तरीके बताए जाते हैं।
जैसे -
• फिजिकल फिटनेस पर जरूर ध्यान दें। व्यायाम से एक नॉर्मल हार्मोन निकलता है जिसे एंडोर्फिन कहा जाता है। इससे दिमाग खुश हो जाता है।
• सोशल मीडिया से ब्रेक लें
• अपनी तुलना दूसरों से कभी न करें।
• गुस्सा दूर करने की कोशिश करें, एंगर मैनेजमेंट करना खुद को खुश रखने की पहली चाभी है क्योंकी जब हमें गुस्सा आता है तो हमारा पूरा शरीर स्ट्रेस में रहता है।
• जिस चीज़ के लिए आप खुश हैं उसे डायरी में जरूर लिखें
• जिंदगी से निगेटिव चीज़ों को हटाकर, सिर्फ पॉजिटिव चीज़ों पर ध्यान दें। हमेशा पाज़िटिव सोचें।
• नियमित संगीत सुनें, अनेक रिसर्च बताते हैं कि ये खुश और पाज़िटिव रहने की बेस्ट थेरेपी है।
और भी ऐसे ही कुछ नुस्खे.. लेकिन यह सबकुछ जानते समझते भी लोग न इनको अपना पाते हैं न खुश रह पाते हैं क्यों ?
हम सभी चाहते हैं कि खुशियां हमेशा जीवन का हिस्सा बनी रहें। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम रोज सुबह उठकर देर रात तक मेहनत करते हैं। ये सारी मेहनत इसलिए ताकि खुश रह सकें, लेकिन फिर भी खुशी नहीं मिलती है बल्कि, इस कारण से अक्सर तनाव या अवसाद का शिकार बन जाते हैं।
तो आइए समझते खुश रहने का एकमात्र उपाय क्या हैं।
॥संतोषम् परम् सुखम् ॥ जी हां यही है खुश रहने का वन एवं ओनली फंडा।
कहा गया है -
" गोधन, गजधन, बाजधन अनाजधन और रतन धन खान
जब आए संतोष धन, सब धन धूरि समान ॥ "
जब तक आप अपनी स्थितियों परिस्थितियों से संतोष करना नहीं सीख लेते आप कभी खुश नहीं रह सकते हैं।
सन्तोष- एक प्रवृत्ति है तथा सुख और शान्ति उसका परिणाम, किन्तु दुर्भाग्यवश हमारे यहाँ सन्तोष का अर्थ आलस्य और प्रमाद माना जाता है। आलस्य और प्रमाद तो तमोगुण के लक्षण हैं जबकि सन्तोष सतोगुण से उत्पन्न होता है।
सन्तोष का अर्थ यह नहीं है कि हम हाथ पर हाथ रखकर बैठ जायें और गाने लगें ‘अजगर करै न चाकरी पंछी करै न काम’ वास्तव में सन्तोष का अर्थ है प्रगति पथ पर धैर्य पूर्वक चलते हुए मार्ग में आने वाले कष्टों और कठिनाईयों का प्रभाव अपने ऊपर न पड़ने देना। संसार के कांटे हम नहीं बीन सकते किन्तु यदि हमने सन्तोष रूपी जूते पहन रखे हैं, तो कोई भी कांटा हमारे मार्ग में बाधक नहीं बन सकता।
हम अपनी शक्ति भर अपनी सर्वांगीण उन्नति के लिए प्रयास करें तथा हर परिस्थिति का दृढ़ता पूर्वक मुकाबला करें तथा हर समय मानसिक शान्ति बनाये रखें यही सन्तोष है।
लोग कामनाओं की पूर्ति से सन्तोष पाना चाहते हैं किन्तु यह मार्ग गलत है। वह तो कामनाओं को समाप्त करने से ही मिलता है।
संतोष का अर्थ है कि आपके पास खुद की परिश्रम और इमानदारी से जो भी प्राप्त है उसमें तृप्त रहना । इससे मन में आत्मसम्मान, स्वाभिमान का भाव जगता है , हृदय प्रफुल्लित रहता है, शरीर निरोग रहता है जीवन में समृद्धि आती है खुशियां आती हैं।
हमारे जीवन की सबसे बड़ी बाधा हमारा मन ही है, जब तक वह शांत नहीं है, जब तक उसकी प्रकृति वासनात्मक है, उसे किसी चीज से संतुष्टि नहीं हो सकती, जिस दिन मन शांत हुआ जीवन के सारे दुख और बाधाए स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं। 1/2